Veer Savarkar

हमारे देश में एक विशेष जमात यह राग अलाप रही है,
कि जिन्नाह अंग्रेजों से लड़े थे इसलिए महान थे।
जबकि वीर सावरकर गद्दार थे,
क्यूंकि उन्होंने अंग्रेजों से माफ़ी मांगी थी।

वैसे इन लोगों को यह नहीं मालूम कि,
जिन्नाह इस्लाम की मान्यताओं के विरुद्ध सारे कर्म करते थे
जैसे सूअर का मांस खाना, शराब पीना, सिगार पीना आदि।
वो न तो पांच वक्त के नमाजी थे। न ही हाजी थे।
न ही दाढ़ी और टोपी में यकीन रखते थे।

जबकि वीर सावरकर
उनका तो सारा जीवन ही राष्ट्र को समर्पित था।

पहले सावरकर को जान तो लीजिये।

  1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे,
    जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की
    मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया,
    और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी,
    हम शोक क्यूँ करें?
    क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन
    पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?
  2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे,
    जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह
    का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में
    बड़े – बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि
    गुलामी का उत्सव मत मनाओ…
  3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में,
    7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…
  4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे,
    जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया,
    तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में
    उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी,
    जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र
    ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…
  5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की
    इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी
    उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को
    मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…
  6. सावरकर पहले भारतीय थे,
    जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण
    पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया,
    और दस रूपये जुर्माना लगाया …
    इसके विरोध में हड़ताल हुई…
    स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर
    के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…
  7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे,
    जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने
    के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ
    नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की
    उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…
  8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे,
    जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को
    ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर
    सिद्ध कर दिया…
  9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे,
    जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर
    ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…
  10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया
    और भारत में भगत सिंहने इसे छपवाया था जिसकी
    एक – एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी…
    भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी…
    पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…
  11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे
    जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से
    भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र
    में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…
  12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे,
    जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला,
    मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण
    उनको न्याय नही मिला और बंदीबनाकर भारत लाया गया…
  13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी
    और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे,
    जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो
    आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…
  14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे,
    जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही
    हंसकर बोले- “चलो,
    ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”
  15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे,
    जिन्होंने काला पानी की सजा के समय
    10 साल से भी अधिक समय तकआजादी के
    लिए कोल्हू चलाकर 30 पौंड तेल प्रतिदिन निकाला…
  16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे,
    जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकड़
    और कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी…
  17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे,
    जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर
    आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…
  18. आधुनिक इतिहास के वीर सावरकर
    पहले विद्वान लेखक थे,
    जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि-
    ‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका.पितृभू:
    पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.’
    अर्थात समुद्र से हिमालय तक
    भारत भूमि जिसकी पितृभू है
    जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है,
    जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है…
  19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे
    जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा
    तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार
    ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा,
    पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के
    बाद ससम्मान रिहा कर दिया…
    देशी-विदेशी दोनों सरकारों को
    उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…
  20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे,
    जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ
    तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा
    तो यह कहकर रोक दिया गया कि,
    वे संसद सदस्य नही थे,
    जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…

21.वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त
स्वातंत्र्य वीर थे, जिनके मरणोपरांत
26 फरवरी 2003 को,
उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके
निधनपर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था….

  1. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे,
    जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए
    कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा,
    लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने
    सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के
    चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…
  2. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए,
    जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल
    के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री
    मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था!
    और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया…
    वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए
    काला पानी में कोल्हू चलाया था,
    जबकि गाँधी ने कालापानी की उस
    जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया….
  3. महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी-देशभक्त,
    उच्च कोटि के साहित्य के रचनाकार,
    हिंदी-हिन्दू-हिन्दुस्थान के मंत्रदाता,
    हिंदुत्व के सूत्रधार वीर विनायक दामोदर सावरकर
    पहले ऐसे भव्य-दिव्य पुरुष, भारत माता के सच्चे सपूत थे,
    जिनसे अन्ग्रेजी सत्ता भयभीत थी,
    आजादी के बाद नेहरु की कांग्रेस सरकार भयभीत थी…
  4. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे,
    जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया…
    पर आश्चर्य की बात यह है कि,
    इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर
    आज वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों
    का सूर्य उदय हो रहा है…

In our country, a special group is chanting this melody,
That Jinnah fought with the British was therefore great.
While Veer Savarkar was a traitor,
Because he had apologized to the British.

Well these people don’t know that,
Jinnah used to do all the deeds against the beliefs of Islam.
Like eating pork, drinking alcohol, smoking cigars etc.
He was neither a five-time prayer. Neither was Haji.
Nor did he believe in beard and cap.

While Veer Savarkar
His whole life was dedicated to the nation.

Get to know Savarkar first.

  1. Veer Savarkar was the first revolutionary patriot,
    Who succeeded Queen Victoria of Britain in 1901
    Opposed the condolence meeting in Nashik on the death,
    And said that she was the queen of our enemy country,
    Why do we grieve?
    Has any Indian great man died?
    But there has been a condolence meeting in Britain.?
  2. Veer Savarkar was the first patriot,
    who performed the coronation ceremony of Edward VII
    in Trimbakeshwar to those celebrating the festival of
    It was said by putting up big posters that
    Don’t celebrate slavery…
  3. The first Holi of foreign clothes in Poona,
    It was burnt by Veer Savarkar on 7 October 1905.
  4. Veer Savarkar was the first such revolutionary,
    Those who burnt foreign clothes,
    Then Bal Gangadhar Tilak in his letter Kesari
    He praised him as Shivaji,
    While South Africa’s own letter of the incident
    In ‘Indian Opinion’ Gandhi had condemned…
  5. Combustion of foreign clothes by Savarkar
    16 years after this first incident, Gandhi
    followed his path and on 11 July 1921
    Foreign clothes boycotted in Mumbai’s Parel
  6. Savarkar was the first Indian,
    Who was killed in 1905 due to the combustion of foreign clothes.
    He was expelled from the Firmusan College, Pune.
    and fined Rs.
    There was a strike in protest against this.
    Tilak himself in ‘Kesari’ letter to Savarkar
    Wrote editorial in favor of…
  7. Veer Savarkar was the first such barrister,
    who passed the grade-in examination in Britain in 1909.
    After the oath of allegiance to the King of Britain
    Didn’t take it… that’s why he needed to be a barrister
    The letter of title was never given…
  8. Veer Savarkar was the first such writer,
    Who called the struggle called Ghadar by the British
    By writing a book titled ‘The Freedom Summer of 1857’
    Proven…
  9. Savarkar was the first such revolutionary writer,
    Who wrote on the book ‘Swatantra Samar of 1857’
    The British Parliament had banned before it was published…
  10. ‘Independence Summer of 1857’ was printed abroad
    And it was printed by Bhagat Singh in India whose
    Each copy was sold for three hundred rupees…
    This was the holy Gita for the Indian revolutionaries…
    This book was found in the homes of patriots in police raids…
  11. Veer Savarkar was the first revolutionary
    who was imprisoned in a sea ship from Britain
    On July 8, 1910, while bringing it to India, the sea
    I jumped and swam to France…
  12. Savarkar was the first revolutionary,
    Whose case went to the International Court of Justice in The Hague,
    But due to the collusion of Britain and France
    They did not get justice and were taken captive to India.
  13. Veer Savarkar World’s First Revolutionary
    and was the first patriot of India,
    whom the British Government gave
    Sentenced to life imprisonment…
  14. Savarkar was the first such patriot,
    who upon hearing the sentence of imprisonment for two births
    Laughing and said – “Come on,
    The Christian authority accepted the reincarnation theory of Hinduism.”
  15. Veer Savarkar was the first political prisoner,
    who at the time of punishment of black water
    more than 10 years of independence
    To extract 30 pounds of oil per day by running a crusher…
  16. Veer Savarkar was the first such prisoner in Kala Pani,
    Who put pebbles on the walls of the dungeon
    And wrote poems with coal and memorized 6000 lines…
  17. Veer Savarkar was the first patriotic writer,
    on whose books
    After independence, there was a ban for many years.
  18. Veer Savarkar of Modern History
    The first scholar was the author,
    Who defined Hindu and wrote that-
    ‘Asindhu Sindhuparyanta Yasya Bharat Role. Pitrubhu:
    Punyabhuschaiva sa vai Hinduritismritah.
    i.e. from the sea to the Himalayas
    India is the land of whose fatherland
    Whose ancestors were born here and this is the land of virtue.
    The one whose pilgrimages are in the land of India, he is a Hindu.
  19. Veer Savarkar was the first patriot
    Whom the British power kept in jails for 30 years
    And after independence, in 1948, the Nehru government
    kept it locked in the Red Fort under the guise of Gandhi’s assassination,
    But after the court found the allegations to be false
    Respectfully released later…
    both the domestic and foreign governments
    He was afraid of his nationalist views.
  20. Veer Savarkar was the first revolutionary,
    When he ascended to heaven on 26 February 1966
    Then some MPs moved a condolence motion in the Indian Parliament.
    So it was stopped by saying that,
    He was not a member of parliament,
    While there was mourning over the death of Churchill…
  21. Veer Savarkar First Revolutionary Patriot
    were freedom fighters, whose posthumous
    On 26 February 2003,
    The statue was installed in the same parliament in which he was once
    Condolence motion was also stopped on the death.
  22. Veer Savarkar was the first such nationalist thinker,
    Whose picture to prevent from being put in the Parliament House
    Congress President Sonia Gandhi wrote a letter to the President,
    But President Dr. Abdul Kalam
    The suggestion letter was rejected and Veer Savarkar’s
    The picture was unveiled by the President with his tax lotus…
  23. Veer Savarkar became the first such patriot,
    Whose inscription was kept in the Cellular Jail of Andaman Islands
    UPA government ministers from Kirti Stambh of
    Mani Shankar Aiyar had removed!
    and smell instead

Author: Sanatan Dharm and Hinduism

My job is to remind people of their roots. There is no black,white any religion in spiritual science. It is ohm tat sat.

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