Kotilingeshwara Temple in Karnataka

Kotilingeshwara is situated in Kolar district of Karnataka The temple is about 6 km from Kolar Gold Fields also known as KGF. The main deity of this temple is Lord Kotilingeshwara.  This Temple was constructed by Swamy Sambha Shiva Murthy The temple boasts of having the largest Linga in Asia which stands 108 feet (33 […]

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Palestinian “refugee” ran Texas terror cell importing 113 jihadist to United States since 2014

Disclosure: Another 41 Foreign-Born Individuals Snagged On Terror Charges Obama administration withholds details as more attacks occur.    BY: Adam Kredo, The Washington Free Beacon January 8, 2016 1:10 pm   Following the discovery of a terrorist cell in Texas allegedly operated by an Iraqi who entered the United States as a refugee, the Washington Free Beacon […]

https://themuslimissue.wordpress.com/2016/01/09/palestinian-refugee-ran-texas-terror-cell-importing-113-jihadist-to-united-states-since-2014/

Pizza boxes contain chemicals that may be worse for you than pizza

Even the packaging of some greasy, late-night indulgence foods may be bad for you. Three substances commonly found in paper and cardboard food containers were banned this week from food packaging by the US Food and Drug Administration (FDA), in a long-delayed response to a 2010 petition filed by a group including the National Resources Defense Council. The substances are part […]

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मुहम्मद कल्कि नहीं

मुल्लों ने
पुराणो का सहारा लेके मुहम्मद को कल्कि अवतार
सिद्ध करने की कोशिस की है |
उन्होंने अपने लेख “हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) और
भारतीय
धर्मग्रन्थ -१”में कहा है की भविष्य पुराण के अनुसार
कल्कि अवतार जो की अंतिम अवतार माना जाता है
वो मुहम्मद के रूप में हो चुका है | उन्होंने जैन और
बौध
धर्म
का भी उदहारण दिया है और कहा है की इन धर्मो के
अनुसार भी मुहम्मद आखरी अवतार है |
अब इससे हास्यपद बात और क्या हो सकती है
की बौध
धर्म जो अवतार वाद के खिलाफ है यहाँ तक
की वो ब्रह्मा , विष्णु , महेश तक को ईश्वर
का अवतार
नहीं मानता, तो भला मुहम्मद को कैसे अवतार घोषित
कर सकता है?,
हाँ बुद्धिस्ट कालचक्र तंत्र को सही मानते
हो तो इसमें
सम्भल जिलेके २५ राजा के जन्म का जिक्र है वो२३३७
में
होगा जिसका नाम कुलिक होगा और जिसके हाथ में
तलवार नहीं बल्कि कालचक्र होगा पर मुहम्मद के हाथ
में
तलवार थी |
भगवत महा पुराण के अनुसार कल्कि का जन्म भारत
के
सम्भल जिले में होगा पर मुहम्मद का जन्म तो अरब
के
रेगिस्तान में हुआ था , अब अरब के रेगिस्तान और
सम्भल
में क्या समानता हो सकती है…?
कल्कि का जन्म कब होगा उसके बारे में कहा गया है
“द्वादश्यां शुक्ल-पक्षस्य माधवे मासि माधवम्”-
कल्कि पुराण ,१:२:१५ , यानि कल्कि का जन्म १२
मार्च को होना निश्चित किया गया है पर मुहम्मद
साहब का जन्म २० अप्रैल ५७१ को हुआ | यूँ तो कई
सारी भिन्तायें गिनवा सकती हूँ वो भी सबूत के साथ
जो ये साबित कर देंगी की जाकिर नायक रट्टू तोते
के आलावा कुछ नहीं हैं |
पर चलिए मैं जाकिर नायक की बात को थोड़ी देर के
लिए सही मान लेती हूँ, मान लेती हूँ की भविष्य पुराण
में मुहम्मद का जिक्र है पर वो जिक्र कैसा है ये आप
खुद
ही देख लीजिये | भविष्य पुराण -प्रति सर्ग ३:३
-५-७-२४-२७ में त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का जिक्र
आया है जिसे शंकर जी ने संहार कर
दिया था वो मरुस्थल में महामाद नाम के राक्षस के
रूप
में जन्म लेगा और पैसचिक धर्म स्थापित करेगा | अब
अगर
जाकिर नायक भविष्य पुराण की बात मानते हैं
तो इन्हें ये भी मानना चाहिए की मुहम्मद साहब
वही महामाद है जिसका जिक्र भविष्य पुराण में
त्रिपुरासुर नाम के राक्षस के रूप में है उनके
व्यक्तित्व
और
कृतित्व से महामाद/ त्रिपुरासुर का प्रोफाइल बिल्कुल
मिलता जुलता है. यदि वे ज़िंदा होते तो इतने बड़े नर-
संहार और नाबालिग बच्चियों के शील हरण के आरोप
में
अंतरराष्ट्रीय अदालत से कठोरतम सज़ा पा चुके होते.
अब में मुहम्मद के जीवन का चित्रण करति हु मेने
उसमे
शाक्ष्य भी दिए है ताकि कोई मुल्ला ये ना कह सके
कि ये सब झूट है ।

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कहानी गिलगमेश और उसके अमृतवा की खोज की (एक प्राचीन इराकी महागाथा)

गिलगमेश या बिलगमेश की वीरगाथा एक मेसोपोटामिया या प्राचीन इराक की वीरगाथा है ।
इस महागाथा को पत्थर की ईट पर लिखा गया था और वे 12 थी पर 12वि सही हालत में न होने के कारन कहानी का अंत कोई नहीं जानता।पर हाल ही में 12वि ईट मिली है और आज में आपको पूरी कहानी बताऊंगा।
ये कहानी है सुमेर शहर के राजा गिलगमेश (3000 ईसापूर्व )की साहसी कारनामो पर है।2500 ईसापूर्व में सर्गोन के पुरे मेसोपोटामिया को जीतने के बाद ये वीरगाथा काफी महसूर हुई ।
सिकंदर के फारस आक्रमण से पहले ये महागाथा वहा बहोत लोकप्रिय थी ।

कहानी

गिलगमेश सुमेर का 5वा एवं शक्तिशाली राजा था,वह आधा मानव और आधा देवता था।वह काफी सुन्दर और हस्त पुस्त था ।कई शहरों को जीतने के बाद उसने उरुक को अपनी राजधानी बनायीं
।अपनी सफलता के कारन और उसके जीतना इस पृथ्वी पर कोई शक्तिशाली न पाकर उसे घमंड हो गया और एक क्रूर राजा बन गया।
वह मजदूरो से अधिक काम कराता और किसी भी सुन्दर कन्या चाहे वो उसके किसी सेनापति की क्यों न हो उसकी इज्ज़त लूट लेता। आखिर लोगो के देवताओ से प्राथना के बाद देवताओ ने उनकी पुकार सुन गिलगमेश का संहार करने एंकि-दू भेज जो की गिलगमेश जितना शक्तिशाली था और एक वन्मनव था। वह जंगले में पशुओ के साथ रहता ।
एक दिन एक शिकारी गिलगमेश के पास गया और उसे बताया की एक वन मानुष है जो उनके फंदों से जानवरों को छुड़ा देता है।
गिलगमेश ने एक सुन्दर देवदासी शमश को एंकि-दू को लुभाकर उरुक लाने भेजा क्युकी उस समय यह मन जाता था की शराब और काम वाष्ण आदमी को सब्याता की और ले जा सकती है।
शमश एंकि-दू के साथ रही और उसे सभ्यता की और ले गयी अब एंकि-दू एक वन मानव नहीं एक सभ्य मानव था ।
उरुक पहोच शमश और एंकि-दू ने शादी कर ली ।
कई दिन उरुक ने रहने के बाद एंकि-दू को गिलगमेश के बारे में पता चला और उसके कुकर्मो के बारे में भी।
एंकि-दू गिलगमेश को चुनौती देने गया।
दोनों के बिच घमासान मल्य युद्ध हुआ आखिर में गिलगमेश को उसकी बुरे का एहसास हुआ और दोनों एक दुसरे की शक्ति से प्रवाहित हो मित्र बनगए।

दोनों मित्रो ने कई शहर जीते आखिर में गिलगमेश को देवताओ के देवदार के बाग़ से देवदार चुराने की शुजी ताकि उसकी लकड़ी से उरुक शहर के दरवाजे बनाये जाये।
एंकि-दू ने पहले तो मन किया पर बाद में मान गया।
दोनों मित्र रस्ते की कई बढाओ को पार कर बाग़ तक पहुचे पर एक मुस्किल थी बाग़ की रक्षा हुबाबा करता था जिसे प्राचीन इराक के वायु देव ने बनाया था।
दोनों हुबाबा से लदे आखिर हुबाबा की मृत्यु हो गयी।
दोनों ने मिल देवदार के वृक्ष कटे और कुछ लकड़ियो की सहयता से एक नाव बनाई ताकि वृष उसमे लाद ले जा सके ।
शहर पहोच गिलगमेश ने उसके दरवाजे बनाये इस बिच हुबाबा की मृयु की खबर देवताओ तक पहोची जिसे सुन इश्तार यानि प्यार की देवी गिलगमेश पर मोहित हो गयी और गिलगमेश के पास अपने प्यार का इज़हार करने गयी।
गिलगमेश ने उसे साफ माना कर दिया।
गिलगमेश ने कहा :- हे प्रेम की देवी इश्तार में तुम्हारे पिछले प्रमो के बारे में जानता हु साथ ही ये भी की जैसे ही तुम्हारा उनसे मन उबा वैसे ही उन सब को मृत्यु देखनी पड़ी।
यह सुन इश्तार अपने पिता अनु के पास गयी और उन्हें स्वर्ग का सांड उरुक पर भेजने के लिए कहा ।
अपने पिता के मन करने के बाद इश्तार ने अनु को धमकी दी की यदि उसके कहा अनुसार नहीं हुआ तो वह नर्क का दरवाजा खोल देगी जिससे हजारो जीन्द मृत(Zombies) बहार आयेंगे और तबाही मचा देंगे ।
विवस हो अनु ने उरुक पर सांड भेज दिया। सांड अपने साथ 7 वर्ष का सुखा लाया ।गिलगमेश और एंकि-दू उस सांड से लड़ने गए ,कई दिन लड़ने के बाद आखिर एंकि-दू ने उस सांड के सिंग पकड़ लिए (निचे दी हुई तस्वीर देखे)और गिलगमेश ने उसे मार डाला ।
पर एंकिदू बहोत घायल हो गया बिलकुल अर्ध्मारा सा इसीलिए वह अब शैया पर ही पड़ा रहता।
एक दिन उसे सपना आया की देवताओ ने सभा बुलाई है और वे कह रहे है की हुबाबा और स्वर्ग के सांड को मरने की वजह से गिलगमेश और एंकि दू ने अपरद किया है इसीलिए इन्हें सजा मिलनी चाहिए मृत्युदंड की पर गिलगमेश सुधर गया है उसे मरना सही नहीं रहेगा पर एंकिदू को तो गिलगमेश का संहार करने के लिए भेज था और अब जोकि गिलगमेश सुधर गया तो एंकिदू का कुछ काम नहीं ,उसका जीवन का लक्ष्य समाप्त हो गया है इसीलिए उसे मृत्युदंड दी जाए।
एंकिदू सपना देख खुदको कोसने लगा ।
वह कहता :- “क्यों में इस निर्दयी मानव दुनिया में आया मैं जंगले में उन पशुओ के साथ ज्यादा सुखी था ।
ह वह नारी शमश क्यों में उसके जाल में फसा नहीं उसके जसल में मैं फास्ता और नाही में उरुक आता।
पर वाही थी जिसने मुझे रोटी दी खाने के लिए और दूध दिया उसने मेरा कितना क्या रखा ,भगवन उसे सदा सुखी रखे।
और गिलगमेश मेरा मित्र मेरा भाई ओह उसने क्या क्या नहीं किया मेरे लिए। मेरे मरन उपरांत वह मेरे लिए सबसे सुन्दर शैया लायेगा। स्वर्ग में मेरा कयल रखने के लिए कई दसिय और रखेल भेजेगा (उस वक़्त किसी आमिर या राजा के साथ जिन्दा रखैले और दास दासिया दफनाई जाती क्युकी यह मन जस्ता था मरने के बाद स्वर्ग में उनकी आवश्कता पड़ेगी )भगवन उसे सदैव जीत दिलाये ।”
यह बात एंकिदू ने गिलगमेश को बताई ,गिलगमेश दुखी हो गया पर वह एंकिदू को दिलासा देता रहा की वह जीवित रहेंगा ।
एंकिदू बहोत बीमार पद गया और आखिर मर गया ।गिलगमेश उसके पास ही था ,उसके मरने के बाद वह उसे जगाने की कोशिस करता पर एंकिदू कुछ नहीं कहता,गिलगमेश ने एंकिदू की दिल की धड़कन देखि वह रुक चुकी थी।
कई दिन तक गिलगमेश उसकी लाश के बाजू में रहा आखिर जब एंकिदू की लाश सड़ने लगी और कीड़े उसे खाने लगे तब गिलगमेश ने उसे सम्मान सहित दफना दिया।
गिलगमेश को दक्खा लगे अपने मित्र की मौत पर वह सोचने लगा जिस कदर उसका प्यारा मित्र मरा क्या उसी कदर वह मरेगा ,गिलगमेश जीना चाहता था वह अमर होना चाहता था तब उसे अपने बड़े बुडो की कहानी याद आई जिउसुद्दु की जो की मनु का इराकी स्वरुप था।उसे याद आया स्वयं देवताओ ने उसे अमरता का राज बताया था ,गिलगमेश उसी का वंशज था जिउसुद्दु उसकी सहयता जरुर करेगा।
गिलगमेश दुनिया के आखिरी छोर की खोज में निकला जहा जिउसुद्दु रहता था।
कई महीनो तक चलने के बाद उसकी हालत भी एंकिदू सी हो गयी,वह स्वयं एंकिदू नजात आता। उसके सारे वस्त्र निकल गए थे और सरीर पर बड़े बड़े बाल आ गए थे।
गिलगमेश दो पहाड़ी के यहाँ पहोचा। उन पहाडियों के बीचो बिच एक गुफा थी जो जिउसिद्दु के घर की ओर जाता पर दो विशाल बिछुओ ने उसका रास्ता रोक लिया ।दोनों से युद्ध कर उन दोनों को गिलगमेश ने मर डाला और गुफा में चला गया।
गुफा में काफी अँधेरा था,बहोत दूर चलने के बाद एक छोर उसे रोशनी नजर आई। उसरी तरफ पहोच उसे एक सुन्दर बाग़ नजर आया ,बाग़ के पास एक सागर था जिसका नाम मृत्यु सागर था और उसके बिच में एक द्वीप पर था जिउसुद्दु का घर।
वह सागर के किनारे पहोच तो एक जल देवी  आई और उसे रोकते हुए बोली की चले जाओ वापस। गिलगमेश ने उसे वह आने का कारन बताया जिसे सुन उस देवी ने उसे समझाया पर वह नहीं माना और आगे चल दिया।
उसे सागर के किनारे एक नाव मिली इसमें जिउसुद्दु माझी था,उस माझी ने भी गिलगमेश को लाख समझाया पर वो मन नहीं आखिर माझी उसे जिउसिद्दु के पास ले गया।
जिउसुद्दु ने गिलगमेश को देखा तो कुश हुआ पर उसकी इच्छा सुन चिंतित हो गया।
गिलगमेश की जिद के बाद जिउसुद्दु मान गया पर एक शर्त राखी ,गिलगमेश को पूरा एक सप्ता बिना सोये बिताना था पर आखिर कुछ दिन न सोने की की कोशिश करने के बाद वह सो गया।
दुखी हो गिलगमेश जाने लगा पर जिउसुद्दु की बीवी ने जिउसिद्दु को गिलगमेश की थोड़ी मदत करने के लिए कहा ।
जिउसुद्दु ने गिलगमेश को रोका और उसे पास ही के अमृत सागर में जसने को कहा जिसकी ताल हटी में एक औषदी थी जो उसको दुबारा जवान बना देगी (बबुली और दुसरे इराकी की शहरों की कहानी अनुसार यह औषदी अमृत्व प्रदान करती है .यह पूरी तरह से सुमेरी कहानी है जो सबसे पहली और असली है )
गिलगमेश अमृत सागर गया और औषद प्राप्त कर उरुक की और गया।
उरुक जाते समय एक तलब आया रस्ते पर तो गिलगमेश उसमे नहाने के लिए गया।
पास ही एक सर्प था जो औषदी की गंद से मोहित हो गया और उसे खा गया। अब सर्प जवान और पहले से अधिक शक्तिशाली बन गया ।उसकी पुराणी केचुली उतर गयी और एक हस्त पुस्त सर्प निकला जो चला गया।
नहाके आने के बाद गिलगमेश ने पाया की औषदी वहा नहीं है साथ ही वहा सर्प की केचुली थी ।वह समझ गया क्या हुआ ।
उसे बहोत दुःख हुआ की उसकी मेहनत एक रेंगने वाले जीव ने नस्त कर दी ।
गिलगमेश उरुक पंहुचा उदास मन से और वह शाशन करने लगा,उसे एहसास हुआ की जग जितना आसन है पर दिल जीतना कठिन इसीलिए अब वह लोगो की भलाई का काम करता ।
कई साल बिड गए और गिलगमेश वृद्ध हो गया उसे अब यह चिंता सताने लगी की उसकी मृत्यु के बाद उसके शारीर और आत्मा का क्या होगा ।
गिलगमेश ने देवता नर्गल को याद किया। नर्गल ने उसे सरीर सहित नर्क में पंहुचा दिया। वहा वह भाधाए पर कर और नर्क के रक्षक को हराकर आगे बड़ा और उसे आखिर एंकिदू की आत्मा मिली।
नर्गल ने भूमि में दरार करदी जिस कारन दोनों मित्र नर्क से बहार आ गए।
गिलगमेश ने एंकिदू से अपना सवाल किया ,जवाब में एंकिदू ने कहा की गिलगमेश इसे सुन नहीं पायेंग पर गिलगमेश की जिद के कारन उसने बताया की इस सरीर को कीड़े खा जाते है और आत्मा पृथ्वी पर भटक मल और सदा हुआ पानी पीती है यदि उसकी कब्र पर रोज आहार न रखा जाये।
कुछ साल पहले तक यही कहानी का अंत मन जाता था की गिलगमेश को मरने के बाद होने वाले कास्ट का पता चलता है पर अभी अभी एक और ईट मिली है जिसके अनुशार गिलगमेश की भी मौत होती है और उसकी आत्मा नर्क में जाती है पर अछे कर्मो के कारन उसे नर्क का न्यायधीश(जज) बना दिया जाता है ।
जय माँ भारती

पश्चिमी मानव विकास की कहानी पर सवाल

यदि आप 19  वि सदी में यूरोप में किसी आदमी से मानव विकास के बारे में पूछते तो वो यही जवाब देता की हम आदम और हव्वा की संताने है ,यही कहानी मुस्लमान भी आपको बताते और यहूदी भी।
आज जब Evolution का सिधांत सामने आया है फिर भी कई लोग आदम और हव्वा की कहानी पर विश्वास रखते है जो की केवल एक मनघडंत कहानी है।
विग्यानुसार मनुष्य केवल एक स्त्री पुरुष से नहीं आ सकता कम से कम आदिमानवो 10 हज़ार की संताने है आज के मनुष्य।
यदि हम आदम और हव्वा की संतान होते तो अपने भाई बहन से शादी कर हम अपना DNA नस्त कर कबके विलुप्त हो गए होते।
चलिए जरा आदम और हव्वा की कहानी पर गौर फरमाते है साथ ही इसके साथ उठते सवालो के जवाब भी देंगे।
आदम और हव्वा की कहानी शुरू होती है  इसराइल के देवता Yehweh की दुनिया की रचना के बाद ।इश्वर पृथ्वी पर ‘Eden Garden ‘ नाम का बाग़ बनाते  है जिसे चार नदिया बाटती  वे नदिया है टिगरिस ,यूफ्रातेस,पिशों और गिहों।
आज टिगरिस और यूफ्रातेस का अस्तित्व है। ये दोनों नदिया आज के इराक में बहती है बाकि दोनों नदिया आजतक नहीं मिली।
यही वजह है की विदेशी जो इसाई, म्मुसलमन और यहूदी है वे इराक को ही सबसे पुराणी सभ्यता बनते है इस सच्चाई को नकार की भारतीय सभ्यता सबसे पुराणी है।
यहाँ इश्वर आदम को बनाते है फिर उसकी फस्लियो से हव्वा को। इश्वर इस दुनिया के हर प्राणी को आदम के पास लाता है  और उनका नामकरण करने कहता है।
कम्करण केबाद इश्वर आदम को कहता है की अब से ये बाग़ तुम्हारा तुम कौनसा भी फल खा सकते हो और किसी भी जानवर का मास खा सकते हो पर याद रखना की ज्ञान के फल  वाले पेड़ का फल न खाना वरना तुम अमृतवा खो दोंगे साथ ही अच्व्हे बुरे की समाज पा लोंगे जिस कारन तुम इस बाग़ में नहीं रह पोंगे।
बाइबिल,कुरान और तोर्रें में साफ़ लिखा है की इश्वर दर गया की फल खाने के बाद वह सब जान जायेंगा और इश्वर की जगह ले लेंगा इसीलिए इश्वर आदम को फल खाने से रोकता है।
ऐसे ही कई दिन बिट गए ।एक साप जो की सैतान था वो हव्वा को अपनी बातो में फसा लेता की फल खालो ।
यहाँ भी लिखा है की केवल औरत जात ही है जो दुसरो की बातो में फसती है।पुरुष कभी नहीं फास्ता।
सैतान की बात मान हव्वा फल खा लेती है और उसकी देख हव्वा भी ।
हव्वा को इस बात के लिए खूब कोस जाता है और इस दुनिया में बुरे लाने वाली खा जाता है।
यह बात जान की आदम ने फल खा लिया इश्वर उन दोनों को बाग़ से निकल देता है।
अब आदम और हव्वा अमृतवा खोने के करे इश्वर से गुहार लगते है।
तरस खाकर इश्वर कहता है की मेरा बेटा मानव बन जन्म लेगा जो तुम्हारे कास्ट दूर करेगा ।
इसाई उस बेटे को ईसा कहते है ,मुस्लमान उसे मुहम्मद और यहूदी उसे मूसा कहते है।
अब इससे कई प्रस्न आते है ।

प्र 1 यदि Yehweh जानता था की आदम फल खायेंग तो अनर्थ हो जायेंगा तो ऐसा पेड बनाया ही क्यों और बनाया तो उसे उस बाग़ में क्यों लगाया ?
उ . क्युकी नहीं Yehweh था या कोई और ये केवल एक मंघदत कहानी है।

प्र 2 यदि फल खाने के बाद ही मानव में समझ आती तो मानव कैसे जीवित था।
उ . ये केवल बकवास है।

प्र 3 यदि हव्वा या औरत दुसरो की बातो में जल्दी फस जाती है और आदम या मर्द नहीं तो हव्वा के पीछे आदम ने भी फल क्यों खाया।
उ. ये झूठ है की केवल औरत ही दुसरो की बातो में जल्दी फसती है ताकि औरतो को दबाकर रखा जाये आपने हाथो के निचे।

प्र 4 यदि वो इश्वर का बेटा ईसा, मुहम्मद या मूसा है तो अबतक लोग अमर क्यों नहीं हुए और उनके कस्त क्यों दूर नहीं हुए।
उ. क्युकी ये सब झूठ है।

प्र5 यदि हव्वा ने फल खा कर मानव को ज्ञान और समझ दी तो उसे पहला पैगम्बर कहना चाहिए न ही आदम को ?
उ. ये धर्म केवल पुरुष प्रधान है इसीलिए ये उमीद छोड़ दो।
ये थी मानव विकास की झूठी कहानी  जो की केवल अन्धविश्वास है ताकि लोगो को मस्सिहा का झासा दे उनसे मन चाह काम कराया जाये।

जय माँ भारती

Ancient India before buddism and Jainism

महाजनपद :गणराज्य और साम्राज्य

By Aman

भारत में सरस्वती  नदी के सूखने के उपरांत लोग भारत के अनेक इलाको में प्रवास कर बसने लगे।
इनमे अधिकतर गणराज्य या राज्य होता इसीलिए इन्हें महाजनपद कहा गया क्युकी ये लोगो के प्रवास का केंद्र था|
महाजनपद असल में एक बड़े शक्तिशाली राज्य को कहते जो कई छोटे जनपदों को मिलकर बना था ,इसीलिए कई राज्यों ने साम्राज्यवाद अपनाया ताकि खुदके राज्यों को जनपद से उठाकर महाजनपद बना सके और यह उपलब्धि के 16 राज्यों को मिली |
महाजनपद का उल्लेख पहली बार पाणिनि द्वारा किया गया था ,उस वक़्त 22 महाजनपद थे और बाकि के छोटे राज्यों को जनपद कहा गया है।
पर 700 ईसापूर्व के आते आते ये केवल 16 रह गए ।
बोध और जैन में महाजनपदो का उल्लेख है पर बहोत से नाम अलग है।
इनमे मगध,गंधर ,कोसल,काशी और अवन्ती का नाम ही पाया जाता है।
600 ईसापूर्व के आते आते बिम्बिसार और अजातशत्रु  आये जिन्होंने मगध का विस्तार किया और मगध सभी जनपदों में मुख्य बन गया।
इससे पहले यह जगह काशी को प्राप्त थी।
यह वह वक़्त था जब भारत में लहे का उपयोग अधिक बड़ा और संस्कृत में प्रगति हुई।
इसी दौर में वैदिक धर्म दक्मगाने लगा और बोध धर्म का उदय हुआ।
जैन धर्म भी लोगो में काफी प्रशिध हुआ ।
निचे 16 महाजनपदो की सूचि है 700 ईसापूर्व से 300 ईसापूर्व के बिच की।
1. कुरु – मेरठ और थानेश्वर;
राजधानी इन्द्रप्रस्थ और हस्तिनापुर ।

2. पांचाल – बरेली, बदायूं
और फ़र्रुख़ाबाद;
राजधानी अहिच्छत्र तथा
कांपिल्य ।

3. शूरसेन – मथुरा के
आसपास का क्षेत्र;
राजधानी मथुरा।

4. वत्स – इलाहाबाद और
उसके आसपास; राजधानी
कौशांबी ।

5. कोशल – अवध; राजधानी
साकेत और श्रावस्ती ।

6. मल्ल – ज़िला देवरिया;
राजधानी कुशीनगर और
पावा (आधुनिक पडरौना)

7. काशी – वाराणसी;
राजधानी वाराणसी।

8. अंग – भागलपुर; राजधानी
चंपा ।

9. मगध – दक्षिण बिहार,
राजधानी राजगृह और पाटलिपुत्र (नन्द काल में )

10. वृज्जि –
ज़िला दरभंगा और
मुजफ्फरपुर; राजधानी
मिथिला, जनकपुरी और
वैशाली ।

11. चेदि – बुंदेलखंड;
राजधानी शुक्तिमती
(वर्तमान बांदा के पास)।

12. मत्स्य – जयपुर;
राजधानी विराट नगर ।

13. अश्मक – गोदावरी घाटी;
राजधानी पांडन्य ।

14. अवंति – मालवा;
राजधानी उज्जयिनी।

15. गांधार – पाकिस्तान
स्थित पश्चिमोत्तर
क्षेत्र; राजधानी
तक्षशिला ।

16. कंबोज – कदाचित
आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान ;
राजधानी राजापुर।

भारत के सोलह महाजनपद

700 ईसापूर्व के आते आते कई कबीलों की जनसँख्या बड़ी। ये कबीला कृषको के थे। इनमे पंचायत राज चलता था इसीलिए जब ये राज्यों के तौर पर उभरे तो गन संघ या गणराज्य आया।
राज्य से उलट इसमें जनता का राज चलता ।
वैशाली गणराज्यो में मुख्य था।
यूनान से पहले और बेहतर लोकतंत्र भारत में था।
अब बात करते है गणराज्यो और राज्यों या साम्राज्यो की।

गणराज्य  


यूनानी लोकतंत्र या गणराज्य को प्रथम क्यों माना जाता है पता नहीं पर भारतीय गणराज्य यूनान से बेहतर थे।
यूनान में आप केवल राजा चुन सकते थे बस पर भारत में बहोत से कम जनता के इशारो पर होता। बाद में गणराज्य कमजोर पड गए और जनता राज चला गया।
गणराज्यो के प्रमुख को नायक या राजा ही कहा जाता।
इनका काम कर वसूलना था और जनता के लिए सड़क आदि बनवाना था।
बहुत से गणराज्यो में गणराज्य के प्रमुख केवल व्यापारी वर्ग के होते और केवल कर वसूलते।
वैशाली  और कलिंग को छोड़ बाकि गणराज्यो में केवल चुनिन्दा वर्ग के लोग ही संघ का हिस्सा बन सकते थे।
वैशाली  और कलिंग में चारो वर्ण को इज़ाज़त थी।
वैशाली  के संघ में 7707 नायक थे।
ये गणराज्य अधिकतर वैश्य वर्ण के लोगो के थे जो ब्राह्मण द्वारा थोपे गए राजा से मुक्ति और जनता का राज्य चाहते थे |
इनकी सभा बैठती थी और हर मसले पर चर्चा होती |
जो चुंगी या कर ये लेते |
बाद में इन्होने सेना की नियुक्ति शुरू कर दी |
वैशाली या वृज्जी गणसंघ 7 गणराज्य से बना था जिसमे से कुछ के नाम ही प्राप्त है |
इनमे से एक गणराज्य शक्य था जिसकी पूरी जनता ही सेना की तरह निपूर्ण थी |
गणराज्य अपने शिष्टाचार के लिए प्रशिध थे |
अधिकतर गणराज्य या गणसंघ बोद्ध धर्मी थे और वहा बोद्ध के नियम ही चलते |
वृज्जी गणसंघ में प्राणदंड की सजा किसी बड़े अपराध पर ही मिलती |यदि देखे तो वृज्जी के गणराज्यो को छोड़ अधिक गणराज्य में कुछ अलग जी नियम थे |
मालक ,शूद्रक और कलिंग में केवल एक ही व्यक्ति चुना जाता जो राजा कहलाता और राजा की तरह ही काम करता |
वृज्जी गणसंघ ,कलिंग ,मालक ,शूद्रक और अन्य कुछ गणराज्यो की नगर प्रणाली और नगर व्यवस्था बिलकुल सरस्वती सिन्धु सभ्यता जैसी थी जो इस बात का प्रमाण देता है की गणराज्य बसने वाले सिधु घटी के थे और आर्य थे नहीं विदेशी |

आप कुछ समानताये देख सकते है सिन्धु घाटी सभ्यता और महाजनपद के सिक्को में

सम्राट अजातशत्रु के काल में गणराज्यो का पतन शुरू हुआ |सम्राट अजातशत्रु ने 36 गणराज्यो को हराया |
मौर्य काल के आते आते के वल कुछ ही गणराज्य रह गए थे |गुप्त काल में वृज्जी के अंत के साथ भारत में गणराज्यो का अंत हुआ |महराज चन्द्रगुप्त ने वृज्जी की राजकुमारी कुमारदेवी से शादी की जिसके बाद वृज्जी एक प्रांत बनकर रह गया |वृज्जी के साथ रिश्ता काफी फायदे का पड़ा महाराज चन्द्रगुप्त क क्युकी वृज्जी के पास उस वक्त मगध का अधिक भाग था जो महाराज चन्द्रगुप्त को मिला |

साम्राज्य गणराज्य से उलट यहाँ महाराज की चलती ,साम्राज्यवादी लोग गणतांत्रिक राज्य वालो को घृणा की दृष्टी से देखते क्युकी उनके लिए गणराज्य के लोग सिर्फ लोभी होते साथ ही गणराज्यो में बोद्ध धर्म की ऐसी धूम मची की वे अधिक बोद्ध धर्म पलने लगे जिसके उपरांत हिन्दू धर्म वालो के लिए केवल साम्राज्य ही सहारा थे |
गणराज्यो में कला और विज्ञानं का उतना महत्व नहीं था जितना साम्राज्यों में थे इसीलिए जब भी भारत किसी साम्राज्य के अधीन रहता तभी कला और विज्ञान का विकास हुआ |
भारत में कई महान साम्राज्य जुए जैसे मौर्य साम्राज्य ,गुप्त साम्राज्य,शुंग साम्राज्य ,सातवाहन साम्राज्य ,विजयनगर साम्राज्य ,मराठा साम्राज्य  और कई अनेक साम्राज्य हुए |विदेशी साम्राज्यवाद से उलट न्हारत के साम्राज्यों ने नेतिकता  और धर्म का साम्राज्य खड़ा किया |
महाजनपदो कशी शुरुआत में सबसे शक्तिशाली था और कशी ने महाजनपदो में साम्राज्यवाद शुरू किया |
आखिरकार बिम्बिसार के काल में शक्ति मगध के हाथ आई ,बिम्बिसार के बाद उनके बेटे अजातशत्रु आये जिन्होंने 36 गणराज्य जीते \
मगध में कई वंश बदले और फिर आया नन्द वंश जिसके केवल दो ही राजाओ ने मगध की सीमा उत्तर में कश्मीर तक ,पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक ,पश्चिम में यमुना तक और दक्षिण में मध्यप्रदेश तक |

नन्द साम्राज्य
मौर्य साम्राज्य अशोक के शाशन में

नन्द वंश के बाद मौर्य वंश आया जिसने पुरे भरत को एक किया |चन्द्रगुप्त मौर्य पहले सम्राट थे मौर्य वंश के ,उन्होंने मगध की सीमाए अफगानिस्तान तक फैलाई ,उत्तर में आज का पूरा कश्मीर ,नेपाल ,तिब्बत के कुछ भाग थे ,दक्षिण कर्णाटक का मौर्य वंश का द्वाज लहराता था |
बिन्दुसार मौर्य  ने 16 छोटे राज्यों को जीता |बिन्दुसार के बाद उनका छोटा लड़का अशोक मौर्य सम्राट बना जिसने कलिंग जीत अखंड भारत पर राज किया |अशोक मौर्य अपनी शांतिप्रियता के लिए जाना जाता है साथ ही बोद्ध धर्म को बढावा देने की वजह से कई बोद्ध लोगो के लिए वह चहेता है |
अशोक मौर्य की मृत्यु के 50 वर्ष बाद ही मौर्य वंश समाप्त हुआ और भारत कई टुकडो में बत गया जिसे फिरसे गुप्तो ने जोड़ा |
मौर्य वंश के साथ ही महाजनपदो का युग खत्म हुआ ,मौर्य साम्राज्य के बाद सिधु नदी के किनारे कई विदेशी राज्यों ने हमला किया साथ ही भारत में कई छोटे छोटे राज्य बसे ,अब किसी को जनपद से महाजनपद नहीं बनना था क्युकी अब सबको साम्राज्य खड़ा करना था |

चुंबकीय उत्तोलन और हिंदू मंदिर (Magnetic levitation and Hindu Temples)

चुंबकीय उत्तोलन और हिंदू मंदिर (Magnetic levitation and Hindu Temples)

आपने जेकी चेन की The Myth नाम की फिल्म तो देखि ही होगी ??
नहीं तो जरुर देखे ,उसमे जेकी चेन एक पुरातत्व विद था जो भारत में एक मंदिर में आता है ।
उस मंदिर में साधू उड़ पा रहे थे क्युकी 2 काले जादुई पत्थर के कारण ।
यह कल्पना नहीं पर सत्य है ,पर साधू के बजाये मुर्तिया हवा में तैरती थी ।

चुम्बक का उल्लेख हिंदू ग्रंथ में
मणिगमनं सूच्यभिसर्पण मित्यदृष्ट कारणं कम्||
वैशेषिक दर्शन ५/१/१५||
अर्थात् तृणो का मणि की ओर चलना ओर सुई
का चुम्बक की ओर चलना,अदृश्य कर्षण
शक्ति के कारण है । सोत्र
यह कणाद मुनि के ग्रंथ  वैशेषिक दर्शन है ,कणाद मुनि 600 ईसापूर्व के थे यानि गौतम बुद्ध के समय का ।
चुंबकीय उत्तोलन या Magnetic Levitation का अर्थ होता है चुंबकीय बल के सहारे तैरना ।
हर चुंबक के 2 ध्रुव होते है उत्तर और दक्षिण
चुंबक का नियम होता है की विपरीत ध्रुव एक दुसरे को आकर्षित करते है और समान ध्रुव एक दुसरे को धकेलते है ।
उधारण :
उत्तर ध्रुव दक्षिण ध्रुव को या दक्षिण ध्रुव उत्तर ध्रुव को आकर्षित करता है
पर
उत्तर ध्रुव उत्तर ध्रुव को या दक्षिण ध्रुव दक्षिण ध्रुव को धकेलता है ।
यही नियम बुलेट ट्रेन में काम आता है ।
2 समान ध्रुव एक दुसरे को धकेलते है जिससे इतना बल पैदा होता है की ट्रेन आगे बड़े ।
इसी का उपयोग हिंदुओ ने अपने मंदिरों में किया ।
मुझे 4 हिंदू मंदिरो का विवरण मिला है जिसमे चुंबकीय उत्तोलन का उपयोग हुआ था ।

सोमनाथ मंदिर (600 इसवी )
गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर को गुजरात के यादव राजाओ ने बनाया था 600 इसवी में ।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंगो में से एक है ।
कई मुस्लमान राजाओ ने इसको तोडा और इसमें स्थित शिव लिंग भी तोड़ दिया ।
स्थानीय लेखो के अनुसार सोमनाथ मंदिर का शिव लिंग हवा में तैरता था ।
हिंदुओ के अलावा मुसलमानों ने भी इसका वर्णन किया ।
क्वाज़िनी अल ज़कारिया सन 1300 इसवी में भारत में आया था ,वे फारसी लेखक थे और दुनिया के अजीब अजीब वस्तुओ पर लिखते थे ।
सोमनाथ के शिवलिंग पर क्वाज़िनी लिखते है :- “सोमनाथ मंदिर के बिच में सोमनाथ की मूर्ति थी ,वह हवा में तैर रही थी ,उसे न ऊपर से सहारा था  न नीचे से ।स्थानीय ही क्या मुस्लमान भी आश्चर्य करेगा ।”
इस विवरण से पुष्टि हो गई है की सोमनाथ मंदिर में शिव लिंग हवा में तैरता था ।
कुछ विद्वानों अनुसार यह आँखों का धोका था ।

सम्राट ललितादित्य मुक्तापिद का विष्णु मंदिर (700 इसवी )
सम्राट ललितादित्य कश्मीर के महान राजा थे जिन्होंने अरब और तिब्बत के हमले को रोक और कन्नौज पर राज किया जो उस समय भारत का केंद्र माना जाता था ।
स्त्री राज्य जो असम में ही कही स्थित था उसे जीतने के बाद सम्राट ललितादित्य ने स्त्री राज्य में ही विष्णु मंदिर की स्थापना की थी ।
विवरणों के अनुसार उस मंदिर में स्थित विष्णु जी की मूर्ति हवा में तैरती थी ।
इस मंदिर की सही स्थिति नहीं पता और इसके अवशेष अभी तक नहीं मिले ।
विद्वानों के अनुसार जिस कदर मुसलमानों ने ललितादित्य का सूर्य मंदिर तोड़ दिया था ठीक वैसे ही इस मंदिर को भी तोड़ा गया था ।

वज्रवराही का मंदिर (800 इसवी )
यह मंदिर है तो बोद्ध पर हिंदू देवी वराही को समर्पित है ।
यह मंदिर भूटान में Chumphu nye में स्थित है ,इस मंदिर के भीतर फोटो लेने की मनाही है इसीलिए वराही देवी की हवा में तैरते हुए फोटो नहीं ।
कई प्रत्यक्षदर्शी मंदिर में जा चुके है और उनके अनुसार वराही देवी की मूर्ति और थल के बिच 1 ऊँगली भर जगह है और मूर्ति बिना सपोर्ट के हवा में है ।
स्थानीय लोगो के अनुसार वह मूर्ति मनुष्य निर्मित नहीं बल्कि प्रकट हुई है ।
कुछ विद्वानों के अनुसार वह मूर्ति चुंबक के कारण हवा में तैर पा रही है ।
क्युकी भूटान और तिब्बत का बोद्ध धर्म बुद्ध के उपदेशो पे कम और हिंदू उपदेशो पर ज्यादा है इसीलिए मंदिर बनाने का यह ज्ञान हिंदुओ से बोद्ध भिक्षुओ को मिला ।
यही एक बची हुई ऐसी मूर्ति है जो सिद्ध करती है की हिंदू मंदिरों में मुर्तिया हवा में तैरती थी ।

कोणार्क का सूर्य मंदिर (1300 इसवी )
इसा के 1300 वर्ष बाद उड़ीसा में पूर्वी गंग राजाओ ने कोणार्क का सूर्य मंदिर बनवाया था ।
स्थानीय कथाओ के अनुसार कोणार्क के सूर्य मंदिर में सूर्य देव की जो मूर्ति थी वह हवा में तैरती थी ।
पुरातात्विक विश्लेषण से पता चला है की मंदिर का मुख्य भाग चुंबक से बना था जो गिर गया था ।
कम से कम 52 टन चुंबक मिलने की बात कही जाती है ।
उसी चुंबक वाले भाग में वह मूर्ति थी ,यह सबसे अच्छा साबुत है हिंदू मंदिरों में चुंबकीय उत्तोलन का क्युकी इस मंदिर में चुंबक मिला है ।
मूर्ति को हवा में उठाने के साथ चुंबक का एक और उपयोग था यानि चुंबकीय चिकित्सा ।
चुंबकीय चिकित्सा का अर्थ है चुंबक की उर्जा से इलाज करना ।
कोणार्क के सूर्य मंदिर का बहोत सा ढाचा गिर गया था जिसमे वह चुंबक से बना भाग भी था ।

भारत में चुंबक का उल्लेख 600 ईसापूर्व से मिलता है ,मुसलमानों के साथ साथ पुरातात्विक सबूत भी हिंदू मंदिरों में चुंबकीय उत्तोलन के सबूत देते है ।

(नीचे फोटो में गणेश जी की मूर्ति हवा में तैर पा रही है चुंबकीय बल के कारण )

जय माँ भारती

Islam and terrorism are linked

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Islamic sex racket in Kerala targets Hindus and non-Muslim girls & women especially.

Islamic Human Trafficking Racket Busted in Kerala.

hinduexistence's avatarStruggle for Hindu Existence

Kerala Sex Racket

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HENB | Thiruvananthapuram | January 17, 2016::A couple who were the prime links of a mammoth flesh trade and human racket has been arrested. The couple Abdul Naseer- Shajida Masoor were nabbed from Mumbai International Airport in connection with sending women abroad under the pretext of various jobs. The duo are said to be the prime link in Bahrain sex racket as well. Four others have been arrested as well. They have been produced at Kochi Crime Branch office.

Sources have revealed that the couple are the main brokers in some of the prime online sex rackets, which have swindled as many as 63 women under the guise of offering various jobs. The duo were arrested by the team led by Anti Terror Squad IG Nikesh Kaushik as part of Operation Daddy…

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