God Vishnu in Nepal

Ancient statue of Lord Vishvarupa (the universal form of the Divine) as described in the 11th chapter of the Bhagavad Gita. Excavated from Changu Narayan Temple, Licchavi, Nepal.
भगवान् नारायण के विश्वरूप का श्रीविग्रह, जिसका निरूपण भगवद् गीता के ११वें अध्याय में किया गया है। यह मूर्ति चांगू नारायण मन्दिर, लिच्छवी, नेपाल से प्राप्त हुई है।

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God Ram and his Guru-Maryada Purushottam

Even if we think that we know everything, we shouldn’t feel reluctant in approaching our masters and learn the secrets of righteousness and the inner reality from them. This is what Lord Rama teaches us by doing it himself. The depth of the Vedic teachings is such that every time a person comes back to it, however a great scholar he might be, he receives a new and fresh insight into his own life through them.
Picture: Lord Rama seated at the lotus feet of his master MaharshiVasishtha.
भले ही हम यह सोचते हों कि हमें तो सब कुछ पता है, फिर भी गुरुजनों की सन्निधि में जा कर और उनके चरणों में बैठ कर धर्म तथा अध्यात्म के गुह्य रहस्यों का ज्ञान प्राप्त करते ही रहना चाहिये। स्वयं भगवान् राम सर्वज्ञ होते हुए भी केवल बाल्यावस्था में ही अध्ययन करने के लिये गुरुजनों के पास नहीं गये, अपितु वनवास से वापस आकर अयोध्यापति बन जाने के उपरान्त भी गुरुजनों की सन्निधि में बैठ कर उनके उपदेश सुना करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं – “बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं” (श्रीरामचरितमानस उत्तरकाण्ड २५.१) अर्थात् ‘महर्षि वसिष्ठ जी वेद और पुराणों की कथायें वर्णन करते हैं और श्री राम जी सुनते हैं, यद्यपि वे सब जानते हैं’। वास्तविकता यह है कि हमारे प्राचीन वेदों के मन्त्रों का गाम्भीर्य ही कुछ ऐसा है कि चाहें बड़े से बड़ा विद्वान ही क्यों न हो, हर बार जब वह उन्हें सुनता है और उनकी गहराई में प्रवेश करने का प्रयत्न करता है, तो उसमें से अपने जीवन व आन्तरिक विकास के लिये ज्ञान व अनुभूति के कोई न कोई अमूल्य मोती लेकर ही लौटता है। अतः इनका अध्ययन व श्रवण करने के लिये सदैव ज्ञानी महापुरुषों की सन्निधि में जाना ही चाहिये; इसी में ही अपना एवं समाज का कल्याण है। ॐ
चित्र: अपने गुरुदेव महर्षि वसिष्ठ के चरणों में बैठे भगवान् श्री राम॥

God Shiva in Hotan, Xinjiang Province, Western China.

Lord Shiva from Khotan, close to modern day Hotan, Xinjiang Province, Western China.
खोतान से प्राप्त भगवान् सदाशिव का प्राचीन चित्र। प्राचीन खोतान आधुनिक होतान नगर के समीप विद्यमान था, जो आज पश्चिमी चीन के शिन्-जिआंग राज्य में पड़ता है।
साभार-https://twitter.com/blog_supplement

Universal Form (Vishvarupa) of Lord Vishnu, circa 700 AD, excacated in Kannauj, Uttar Pradesh, India

Universal Form (Vishvarupa) of Lord Vishnu, circa 700 AD, excacated in Kannauj, Uttar Pradesh, India.
भगवान् विष्णु का विश्वरूप, लगभग ७०० ईस्वी, कन्नौज (उत्तर प्रदेश) से प्राप्त।
साभार – https://twitter.com/blog_supplement

Bhagavan Vishnu era of the Utpala Dynasty (circa 800-900 AD), Kashmir

Bhagavan Vishnu from the era of the Utpala Dynasty (circa 800-900 AD), Kashmir. Looks so similar to Tibetan Buddhist statues. Most kings of the Kashmirian Utpala Dynasty were devotees of Bhagavan Vishnu. उत्पल राजवशं कालीन (लगभग ८००-९०० ईस्वी) कश्मीर में ढाला गया भगवान् विष्णु का श्रीविग्रह। उत्पल राजवंश के कई सम्राट् वैष्णव थे। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह प्रतिमा तिब्बती बौद्ध प्रतिमाओं से पर्याप्त साम्य रखती है।

God Vishnu circa 900 AD.

Bhagavan Vishnu with two Lakshmis: Shri Devi and Bhudevi. These statues are from the Chera (Kerala-Putra) Dynasty, Tamilnadu and Kerala, and are dated to circa 900 AD. श्रीदेवी तथा भूदेवी समेत भगवान् विष्णु, केरलपुत्र राजवंश (केरल तथा तमिलनाडु) कालीन (लगभग ९०० ईस्वी) प्रतिमायें।

God Vishnu from Gandhara

Ancient deity of Bhagavan Vishnu from Gandhara (Kandahar, Afghanistan) just before the first Islamic assault and the fall of the Panjab.
गान्धार (वर्तमान कन्दहार, अफगानिस्तान) पर इसलामिक आक्रमण से कुछ ही पूर्व का भगवान् विष्णु का त्रिमूर्ति श्री विग्रह, जिसमें उनका वराह एवं नृसिंह स्वरूप भी दिख रहा है।

Dara Shikoh killed by younger brother Aurangjeb -Islamic terrorism

Mughal Prince Dara Shikoh (1615-1659 AD), a great admirer of the Vedic culture and the first translator of the Upanishads into Persian, visiting saint Kamal, the son of the great mystic saint Kabir. Dara Shikoh was the eldest son of Shah Jahan and Mumtaz Mahal, who are buried in the Taj Mahal. His younger brother Aurangzeb killed him declaring him an apostate from Islam.
मुगल राजकुमार दाराशिकोह, जिनकी उपनिषदों के प्रति बहुुत गहरी श्रद्धा थी जिसके कारण उन्होंने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया था, सन्त कबीर के पुत्र सन्त कमाल की सन्निधि में।

 

Shiva Lingas in Cambodia

Thousands of Lingas and other Vedic deities carved into the river-bed of the Kbal Spean river in Cambodia.
कम्बोडिया की क्बाल स्पिएन नदी के तल में प्राचीन काल में उकेरे गये सैकड़ों शिवलिङ्ग तथा वैदिक देवी-देवताओं की प्रतिमायें॥

The “Indianizers” of Kambuja Desha (modern day Cambodia). Thousands of years ago these men were among the intrepid pioneers who took India’s culture to far away lands. We need to remember their names and be inspired by the great work they did, so that we can reawaken this spirit in our younger generation. These were the great souls who inspired the Vedic culture in ancient Cambodia, which eventually led to the construction of the largest Hindu temple complex in the world: The Angkor Vat temple which was dedicated to Lord Vishnu. This is also the largest religious structure in the world. Remnants of a glorious Hindu past, such as great temples dedicated to Lord Shiva and river-beds in which thousands of Shiva Lingas have been carved, are found all around Cambodia even today.
ये कुछ उन श्रेष्ठ भारतीय महामना धर्मप्रचारकों के नाम की सूची है, जिन्हें शायद हम आज भारत में भूल चुके हैं, लेकिन जिन्होंने प्राचीन काल में सैकड़ों मील दूर की यात्रा करके कम्बुज देश (आधुनिक कम्बोडिया) में वैदिक सनातन धर्म की स्थापना की थी, जिसके परिणाम स्वरूप आज भी हमें कम्बोडिया में जो वैदिक सनातन धर्म से जुड़े ध्वंसावशेष उपलब्ध होते हैं,वे वास्तव में आश्चर्य जनक हैं। कम्बोडिया का ९०० वर्ष प्राचीन विष्णु मन्दिर ‘अंकोर वट’ विश्व का सबसे विशाल हिन्दू मन्दिर ही नहीं, विश्व का सबसे विशाल धार्मिक स्थान है; अन्य कोई भी धर्म इससे विशाल धर्मस्थान न बना पाया। इसके साथ ही भगवान् सदा शिव आदि भारतीय विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित अनेकों विशाल मन्दिरों के ध्वंसावशेष आज भी कम्बोडिया में खड़े हैं। सबसे आश्चर्यजनक मुझे लगी क्बाल स्पिएन नदी, जिसके तल में पत्थरों पर हजारों शिवलिङ्ग तथा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां प्राचीन काल में उकेरी गयी थीं। एक बार ध्यान दें इन महामना मनीषियों के नामों की ओर, शायद इनका शुभ संस्मरण ही हमारे अन्दर उस सोई हुई वैदिक आत्मा को जागृत कर दे, जिसके कारण ये मनीषी सैकड़ों मीलों की यात्रा करके इस वैदिक ज्योति के महान् ज्योतिवाहक बने॥

Shiva Linga In Indonesia

Natural Shiva Linga, Lingga Islands, Indonesia.
Natural Shiva Linga on top of Mount Daik in the Lingga Islands of Indonesia. Obviously, the Indonesian Lingga archipelago gets its name from this natural structure. The archipelago lies in the south of Singapore. It must be noted that Shaivism was the form of Hinduism which was most popular in Indonesia before the advent of Islam.
प्राकृतिक शिवलिङ्ग, लिङ्ग द्वीपसमूह, इण्डोनेशिया..
इण्डोनेशिया के लिंग द्वीपसमूह में विद्यमान डाईक पर्वत की चोटी पर दिख रहा प्राकृतिक शिव लिङ्ग। इसमें कोई संशय नहीं कि इण्डोनेशिया के लिंग द्वीप समूह का नामकरण प्राचीन काल में इसी पर्वत की चोटी पर दिख रहे प्राकृतिक शिवलिङ्ग के कारण ही किया गया होगा। यह द्वीप समूह सिंगापुर के दक्षिण में विद्यमान है। इसलाम के आगमन से पूर्व शैव सम्प्रदाय ही इण्डोनेशिया में सबसे अधिक फैला हुआ हिन्दू सम्प्रदाय था।

 

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