How India prevented from Muslim terrorism by Kshatriyas

स्वयं भी पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाएं, ये आपकी आंखें खोल देगी…*

👉 622 ई से लेकर 634 ई तक मात्र 12 वर्ष में अरब के सभी मूर्तिपूजकों को मुहम्मद ने इस्लाम की तलवार के बल पर मुसलमान बना दिया।
👉 634 ईस्वी से लेकर 651 तक, यानी मात्र 16 वर्ष में सभी पारसियों को तलवार की नोक पर इस्लाम का कलमा पढ़वा दिया गया।
👉 640 में मिस्र में पहली बार इस्लाम ने पांव रखे, और देखते ही देखते मात्र 15 वर्षों में, 655 तक इजिप्ट के लगभग सभी लोग मुसलमान बना दिये गए।
👉 नार्थ अफ्रीकन देश जैसे – अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को आदि देशों को 640 से 711 ई तक पूर्ण रूप से इस्लाम धर्म मे बदल दिया गया, 3 देशों का सम्पूर्ण सुख चैन लेने में मुसलमानो ने मात्र 71 साल लगाए।
👉 711 ईस्वी में स्पेन पर आक्रमण हुआ, 730 ईस्वी तक स्पेन की 70% आबादी मुसलमान थी। मात्र 19 वर्षों में!
👉 तुर्क थोड़े से वीर निकले, तुर्को के विरुद्ध जिहाद 651 ईस्वी में शुरू हुआ, और अगले सौ वर्ष तक संघर्ष करते करते अंततः 751 ईस्वी तक सारे तुर्क मुसलमान बना दिये गए।
👉 इंडोनेशिया के विरुद्ध जिहाद मात्र 40 वर्ष में पूरा हुआ। 1260 में मुसलमानो ने इंडोनेशिया में मार काट मचाई, और 1300 ईस्वी तक सारे इंडोनेशियाई मुसलमान बन चुके थे।
👉 फिलिस्तीन, सीरिया, लेबनान, जॉर्डन आदि देशों को 634 से 650 के बीच मुसलमान बना दिया गया।
उसके बाद 700 ईस्वी में भारत के विरुद्ध जिहाद शुरू हुआ जो अब तक चल रहा है।
👉 अब आप भारत की स्थिति देखिये… जिस समय आक्रमणकारी ईरान तक पहुंचकर अपना बड़ा साम्राज्य स्थापित कर चुके थे, उस समय उनकी हिम्मत नही थी कि भारत के राजपूत साम्राज्य की और आंख उठाकर भी देख सकें..!!
👉 636 ईस्वी में खलीफा ने भारत पर पहला हमला बोला। एक भी आक्रांता जिंदा वापस नही जा पाया।
👉 कुछ वर्ष तक तो मुस्लिम आक्रान्ताओ की हिम्मत तक नही हुई कि भारत की ओर मुंह करके सोया भी जाएं, लेकिन कुछ ही वर्षो में गिद्धों ने अपनी जाति दिखा ही दी…!
👉 दोबारा आक्रमण हुआ, इस समय खलीफा की गद्दी पर उस्मान आ चुका था। उसने हाकिम नाम के सेनापति के साथ विशाल इस्लामी टिड्डिडल भारत भेजा। सेना का पूर्णतः सफाया हो गया, और सेनापति हाकिम बंदी बना लिया गया। हाकिम को भारतीय राजपूतो ने बहुत मारा, और बड़े बुरे हाल करके वापस अरब भेजा, जिससे उनकी सेना की दुर्गति का हाल, उस्मान तक पहुंच जाएं।
👉 यह सिलसिला लगभग 700 ईस्वी तक चलता रहा। जितने भी मुसलमानों ने भारत की तरफ मुँह किया, राजपूतो ने उनका सिर कंधे से नीचे उतार दिया ।।
👉 जब 7वी सदी इस्लाम की शुरू हुई, जब अरब से लेकर अफ्रीका, ईरान, कई यूरोपीए देश, सीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया, तुर्की यह बड़े बड़े देश जब मुसलमान बन गए, भारत में “बप्पा रावल” महाराणा प्रताप के पितामह का जन्म हो चुका था। वे पूर्णतः योद्धा बन चुके थे, इस्लाम के पंजे में जकड़ गए अफगानिस्तान तक से मुसलमानों को उस वीर ने मार भगाया। केवल यही नही, वह लड़ते लड़ते खलीफा की गद्दी तक जा पहुंचे, जहां खुद खलीफा को अपनी जान की भीख मांगनी पड़ी।
👉 उसके बाद भी यह सिलसिला रुका नहीं। नागभट्ट प्रतिहार द्वितीय जैसे योद्धा भारत को मिले। जिन्होंने अपने पूरे जीवन राजपूत धर्म का पालन करते हुए पूरे भारत की न केवल रक्षा की, बल्कि हमारी शक्ति का डंका विश्व में बजाए रखा।
👉 पहले बप्पा रावल में साबित किया था कि अरब अपराजित नही हैं, लेकिन 836 ई के समय भारत में वह हुआ, जिससे विश्वविजेता मुसलमान थर्रा गए…। मुसलमानों ने अपने इतिहास में उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन कहा है, वह सरदार भी राजपूत ही थे।
👉सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार। मिहिरभोज के बारे में कहा जाता है, कि उनका प्रताप ऋषि अगस्त्य से भी अधिक चमका..। ऋषि अगस्त्य वही है, जिन्होंने श्रीराम को वह अस्त्र दिया था, जिससे रावण का वध सम्भव था। राम के विजय अभियान के हिडन योद्धाओं में एक..! उन्होंने मुसलमानो को केवल 5 गुफाओं तक सीमित कर दिया।। यह वही समय था, जिस समय मुसलमान किसी युद्ध में केवल जीत हासिल करते थे, और वहां की प्रजा को मुसलमान बना देते, भारत के वीर राजपूत मिहिरभोज ने इन अक्रान्ताओ को अरब तक थर्रा दिया था।
👉 पृथ्वीराज चौहान तक इस्लाम के उत्कर्ष के 400 सालों बाद तक भारत के राजपूतो ने इस्लाम नाम की बीमारी भारत को नही लगने दी, उस युद्ध काल में भी भारत की अर्थव्यवस्था को गिरने नही दिया।। उसके बाद कुछ राजपूतों की आपसी खींच तान व दुश्मनी का शैतानी सहारा लेकर मुसलमान कुछ जगह घुसने में कामयाब भी हुए, लेकिन राजपूतों ने सत्ता गंवाकर भी हार नही मानी। एक दिन वह चैन से नही बैठे, अंतिम वीर दुर्गादास जी राठौड़ ने दिल्ली को झुकाकर, जोधपुर का किला मुगलों के हलक ने निकाल कर हिन्दू धर्म की गरिमा, वीरता और शौर्य को चार चांद लगा दिए ।।
👉 किसी भी देश को मुसलमान बनाने में मुसलमानो ने औसतन 20 वर्ष नही लिए। भारत में 500 वर्ष अलग अलग क्षेत्रों पर राज करने के बाद भी मेवाड़ के शेर महाराणा राजसिंह ने अपने घोड़े पर भी इस्लाम की मुहर नही लगने दी।
👉 महाराजा रणजीत सिंह के पराक्रम को कौन नहीं जानता जिन्होंने हर दुश्मन को पराजित किया
👉 महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड़, मिहिरभोज, दुर्गावती, चौहान, परमार सहित लगभग सारे राजपूत अपनी मातृभूमि के लिए जान पर खेलते गए। एक समय तो ऐसा आ गया था जब लड़ते लड़ते राजपूत केवल 2% पर आकर ठहर गए ।।
👉 एक बार पूरी दुनिया की ओर देखें और आज अपना वर्तमान देखे…!! जिन मुसलमानो ने 20 वर्षों में लगभग आधे विश्व की आबादी को मुसलमान बना दिया, वह भारत में केवल पाकिस्तान बांग्लादेश तक सिमट कर ही क्यों रह गए ?
👉 मान लिया कि उस समय लड़ना राजपूत राजाओं का धर्म था, लेकिन जब राजाओं ने अपना धर्म निभा दिया, तो आज उनकी बेटियों, पोतियों पर काल्पनिक कहानियां गढ़कर उन योद्धाओं के वंशजो का हिंदुओ द्वारा ही अपमान किया गया। कुछ कथित सेकुलर हिन्दूओं द्वारा ही उन आक्रांताओं के थोपे गए झूंठे इतिहास का महिमामंडन करना बेहद शर्मनाक है।
👉 राजा भोज, विक्रमादित्य, नागभट्ट प्रथम, नागभट्ट द्वितीय, चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार, समुद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, छत्रसाल बुंदेला, आल्हा उदल, राजा भाटी, भूपत भाटी, चाचादेव भाटी, सिद्ध श्री देवराज भाटी, कानड़ देव चौहान, वीरमदेव चौहान, हठी हम्मीर देव चौहान, विग्रहराज चौहान, मालदेव सिंह राठौड़, विजय राव लांझा भाटी, भोजदेव भाटी, चूहड़ विजयराव भाटी, बलराज भाटी, घड़सी, रतनसिंह, राणा हमीर सिंह और अमर सिंह, अमर सिंह राठौड़, दुर्गादास राठौड़, जसवंत सिंह राठौड़ मिर्जा, राजा जयसिंह, राजा जयचंद, भीमदेव सोलंकी, सिद्ध श्री राजा जय सिंह सोलंकी, पुलकेशिन द्वितीय सोलंकी, रानी दुर्गावती, रानी कर्णावती, राजकुमारी रत्नाबाई, रानी रुद्रा देवी, हाड़ी रानी, पद्मावती, तोगा जी, वीरवर कल्लाजी, जयमल जी जेता कुपा, गोरा बादल राणा रतन सिंह, पजबन राय जी कच्छवा, मोहन सिंह मंढाड़, राजा पोरस, हर्षवर्धन बेस, सुहेलदेव बेस, राव शेखाजी, राव चंद्रसेन जी दोड़, राव चंद्र सिंह जी राठौड़, कृष्ण कुमार सोलंकी, ललितादित्य मुक्तापीड़, जनरल जोरावर सिंह कालुवारिया, धीर सिंह पुंडीर, बल्लू जी चंपावत, भीष्म रावत चुण्डा जी, रामसाह सिंह तोमर और उनका वंश, झाला राजा मान सिंह, महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर, स्वतंत्रता सेनानी राव बख्तावर सिंह अमझेरा वजीर सिंह पठानिया, राव राजा राम बक्स सिंह, व्हाट ठाकुर कुशाल सिंह, ठाकुर रोशन सिंह, ठाकुर महावीर सिंह, राव बेनी माधव सिंह, डूंगजी, भुरजी, बलजी, जवाहर जी, छत्रपति शिवाजी और हमारे न जाने अनगिनत लोक देवता और एक से बढ़कर एक योद्धा लोक देवताओं, संत, सती जुझार, भांजी जडेजा, अजय पाल देव जी।
👉 यह तो केवल कुछ ही नाम हैं जिन्हें हमने गलती से किसी इतिहास या फिर किसी पुस्तक में पढ़ लिया वरना स्कूल पाठ्यक्रम में तो इन वीरों नाम निशान नहीं मिलेगा। एक से बढ़कर एक योद्धा पैदा हुए हैं जिन्होंने 18 वर्ष की आयु से पहले ही अपना योगदान दे दिया घर के घर, गांव के गांव, ढाणी की ढाणी खाली हो गईं… जब कोई भी पुरुष नहीं बचा किसी गांव या ढाणी में पूरा का पूरा परिवार पूरे पूरे गांव कुर्बान हो गए… एक रणभेरी पर बच्चा बच्चा जान हथेली पर रखकर चल गया धर्म के लिए आहुति देने…।
👉 आज हमारे यहाँ हिन्दू, सिख, ईसाई आदि इन्हीं बलिदानियों के महान बलिदानों के कारण अस्तित्व में बचे हुए हैं।

*👉 सभी बंधुओं से निवेदन है कि यह जानकारी अधिक से अधिक शेयर करें क्योंकि ये जानकारी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने को नहीं मिलेगी। कारण यह है कि स्वतंत्र भारत के पहले पांच शिक्षा मंत्री उन आक्रांता मुगलों के प्रचारक थे!!

Read yourself and teach your children too, it will open your eyes…*

In just 12 years from 622 AD to 634 AD, Muhammad converted all the idolaters of Arabia to Islam on the strength of the sword of Islam.
From 634 AD to 651, that is, in just 16 years, all the Parsis were taught the Kalama of Islam at the tip of the sword.
Islam first set foot in Egypt in 640, and in just 15 years, by 655, almost all the people of Egypt were converted to Islam.
North African countries like – Algeria, Tunisia, Morocco etc. were completely converted to Islam from 640 to 711 AD, Muslims took only 71 years to take complete happiness of 3 countries.
Spain was invaded in 711 AD, by 730 AD 70% of the population of Spain was Muslim. In just 19 years!
The Turks turned out to be a little brave, the jihad against the Turks began in 651 AD, and after fighting for the next hundred years, all the Turks were finally converted to Muslims by 751 AD.
Jihad against Indonesia completed in just 40 years. In 1260, Muslims attacked Indonesia, and by 1300 AD all Indonesians had become Muslims.
Countries like Palestine, Syria, Lebanon, Jordan etc. were made Muslims between 634 and 650.
_ after that jihad against India started in 700 AD which is going on till now._
Now you see the condition of India… At the time when the invaders had established their big empire after reaching Iran, at that time they did not have the courage to see the Rajput empire of India even by raising their eyes..!!
In 636 AD, the Caliph launched the first attack on India. Not a single invader could go back alive.
For a few years, the Muslim invaders did not even dare to sleep facing India, but within a few years the vultures showed their caste…!
There was an attack again, at this time Osman had come to the throne of the Caliph. He sent a huge Islamic locust to India with a general named Hakim. The army was completely wiped out, and the commander Hakim was taken prisoner. The prince was killed a lot by the Indian Rajputs, and sent back to Arabia in a very bad condition, so that the condition of the misfortune of his army would reach Osman.
This process continued till about 700 AD. All the Muslims who turned their face towards India, Rajputs took their heads down from the shoulders.
When 7th century Islam started, when from Arabia to Africa, Iran, many Europa countries, Syria, Morocco, Tunisia, Turkey when these big countries became Muslims, “Bappa Rawal” Maharana Pratap’s grandfather was born in India It was over He had become a complete warrior, the Muslims were killed by that hero from Afghanistan, caught in the claws of Islam. Not only this, while fighting he reached the throne of the Caliph, where the Caliph himself had to beg for his life.
Even after that this process did not stop. India got warriors like Nagabhatta Pratihara II. Those who followed Rajput religion their whole life not only protected the whole of India, but also kept the sting of our power in the world.
It was first proved in Bappa Rawal that Arabs are not undefeated, but during 836 AD, it happened in India, which stunned the world-conquering Muslims. Muslims have called him their biggest enemy in their history, that Sardar was also a Rajput.
Emperor Mihirbhoja Pratihara. It is said about Mihirbhoja, that his majesty shone more than sage Agastya. Sage Agastya is the one who gave the weapon to Shri Ram, by which it was possible to kill Ravana. One of the hidden warriors of Rama’s conquest..! He limited the Muslims to only 5 caves. This was the same time, when the Muslims only won a war in a war, and would have made the people there Muslims, the brave Rajput of India, Mihirbhoj, shook these revolutionaries to Arabia.
Till 400 years after the rise of Islam till Prithviraj Chauhan, the Rajputs of India did not let the disease named Islam affect India, did not allow India’s economy to fall even during that war. After that, the Muslims managed to enter some places by taking the diabolical support of mutual tension and enmity of some Rajputs, but the Rajputs did not give up even after losing their power. One day he did not sit peacefully, the last hero Durgadas ji Rathore bowed down Delhi, the fort of Jodhpur was taken out by the circles of the Mughals, adding to the dignity, valor and valor of Hindu religion. .
Muslims did not take an average of 20 years to convert any country into a Muslim. Even after ruling over different regions in India for 500 years, Maharana Raj Singh, the lion of Mewar, did not allow the stamp of Islam even on his horse.
Who does not know the might of Maharaja Ranjit Singh who defeated every enemy
Almost all Rajputs including Maharana Pratap, Durgadas Rathod, Mihirbhoj, Durgavati, Chauhan, Parmar went on to play for their motherland. There was a time when the fighting Rajputs stopped at only 2%.
Look at the whole world once and see your present today…!! The Muslims who converted almost half of the world’s population into Muslims in 20 years, why did they remain confined to Pakistan and Bangladesh only in India?
It was accepted that fighting was the religion of the Rajput kings at that time, but when the kings performed their religion, today the descendants of those warriors were insulted by the Hindus by creating imaginary stories on their daughters and granddaughters. Glorifying the false history imposed by some so-called secular Hindus

Well of Zamzam

Images: Well of Zamzam.

Well of Zamzam is existing since thousands of years when Hinduism was practiced till 610 A.D. in present day Saudi Arabia. & Islam came into existence only in 610 A.D.

The Well of Zamzam (or the Zamzam Well, or just Zamzam; Arabic: زمزم‎‎) is a well located within the Masjid al-Haram in Mecca, Saudi Arabia, 20 m (66 ft) east of the Kaaba, the holiest place in Islam. According to Islamic mythology, it is a miraculously generated source of water from God, which sprang thousands of years ago!

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Image: i. Old well of Zamzam

ii. Zamzam well entrance. Location Masjid al-Haram, Mecca

iii. Location of Zamzam Well in Mecca, Saudi Arabia

iv. The Zamzam Well’s old location for men. The location for women was separate.
Well of Zamzam: The Zamzam Well is existing since thousands of years when Saudi Arabia was also a Hindu Country. Whereas Islam came into existence only in 610 A.D. 
1. Technical information: 

The Zamzam well was excavated by hand, and is about 30 m (98 ft) deep and 1.08 to 2.66 m (3 ft 7 in to 8 ft 9 in) in diameter. It taps groundwater from the wadi alluvium and some from the bedrock. Originally water from the well was drawn via ropes and buckets, but today the well itself is in a basement room where it can be seen behind glass panels (visitors are not allowed to enter). Electric pumps draw the water, which is available throughout the Masjid al-Haram via water fountains and dispensing containers near the Tawaf area.
Hydro-geologically, the well is in the Wadi Ibrahim (Valley of Abraham). The upper half of the well is in the sandy alluvium of the valley, lined with stone masonry except for the top metre (3 ft) which has a concrete “collar”. The lower half is in the bedrock. Between the alluvium and the bedrock is a 1⁄2-metre (1 ft 8 in) section of permeable weathered rock, lined with stone, and it is this section that provides the main water entry into the well. Water in the well comes from absorbed rainfall in the Wadi Ibrahim, as well as run-off from the local hills. Since the area has become more and more settled, water from absorbed rainfall on the Wadi Ibrahim has decreased.
The Saudi Geological Survey has a “Zamzam Studies and Research Centre” which analyses the technical properties of the well in detail. Water levels were monitored by hydrograph, which in more recent times has changed to a digital monitoring system that tracks the water level, electric conductivity, pH, Eh, and temperature. All of this information is made continuously available via the Internet. Other wells throughout the valley have also been established, some with digital recorders, to monitor the response of the local aquifer system.
Zamzam water is colourless and odorless, but has a distinct taste, with a pH of 7.5–7.7, indicating that it is alkaline to some extent.
2. Mineral concentration

as reported by researchers at King Saud University
mineral concentration

mg/L oz/cu in

Sodium 133 7.7×10−5

Calcium 96 5.5×10−5

Magnesium 38.88 2.247×10−5

Potassium 43.3 2.50×10−5

Bicarbonate 195.4 0.0001129

Chloride 163.3 9.44×10−5

Fluoride 0.72 4.2×10−7

Nitrate 124.8 7.21×10−5

Sulfate 124.0 7.17×10−5

Total dissolved solids 835 0.000483
3. The water and potential health risks

The British Food Standards Agency has in the past issued warnings about water claiming to be from the Zamzam Well containing dangerous levels of arsenic; such sales have also been reported in the United Arab Emirates (UAE), where it is illegal to sell Zamzam water. The Saudi government has prohibited the commercial export of Zamzam water from the kingdom. In May 2011, a BBC London investigation found that water taken from taps connected to the Zamzam Well contained high levels of nitrate, potentially harmful bacteria, and arsenic at levels three times the legal limit in the UK, the same levels found in illegal water purchased in the UK. Arsenic is a carcinogen, raising concerns that any who regularly consume commercial Zamzam water in large quantities may be exposed to higher risks of cancer.
Later in that month the Council of British Hajjis stated that drinking Zamzam water was safe and disagreed with the BBC report. They also went on to point out that the Government of Saudi Arabia does not allow the export of Zamzam water for resale. Also stating that it was unknown if the water being sold in the UK was genuine, people should not buy it and report the sellers to the Trading Standards.
The BBC’s findings have drawn mixed reactions from the Muslim community. Environmental health officer Dr Yunes Ramadan Teinaz told the British broadcaster about commercially marketed Zamzam water that, “People see this water as a holy water. They find it difficult to accept that it is contaminated, but the authorities in Saudi Arabia or in the U.K. must take action.” The Saudi authorities have stated that water from the well was tested by the Group Laboratories of CARSO-LSEHL in Lyon, licensed by the French Ministry of Health for the testing of drinking water. According to reports of these results, the level of arsenic in Zamzam water taken at its source is much lower than the maximum amount permitted by the World Health Organization. The Saudi authorities have thus said that the water is fit for human c consumption. Zuhair Nawab, president of the Saudi Geological Survey (SGS), has claimed that the Zamzam Well is tested on a daily basis, in a process involving the taking of three samples from the well. These are said to be examined in the King Abdullah Zamzam Water Distribution Center in Mecca, which is equipped with advanced facilities.
The Well of Zamzam (or the Zamzam Well, or just Zamzam; Arabic: زمزم‎‎) is a well located within the Masjid al-Haram in Mecca, Saudi Arabia, 20 m (66 ft) east of the Kaaba, the holiest place in Islam. According to Islamic mythology, it is a miraculously generated source of water from God, which sprang thousands of years ago!

Arab before Muhammad’s terrorism.

इराक का एक पुस्तक है, जिसे इराकी सरकार ने खुद छपवाया था। इस किताब में 622 ई से पहले के अरब जगत का जिक्र है। आपको बता दें कि ईस्लाम धर्म की स्थापना इसी साल हुई थी। किताब में बताया गया है कि मक्का में पहले शिव जी का एक विशाल मंदिर था जिसके अंदर एक शिव लिंग थी जो आज भी मक्का के काबा में एक काले पत्थर के रूप में मौजूद है। पुस्तक में लिखा है कि मंदिर में कविता पाठ और भजन हुआ करता था।प्राचीन अरबी का व्य संग्रह गंथ ‘सेअरूल-ओकुल’के 257वें पृष्ठ पर मोहम्मद से 2300 वर्ष पूर्व एवं ईसा मसीह से 1800 वर्ष पूर्व पैदा हुए लबी-बिन-ए-अरव्तब-बिन-ए-तुरफा ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में भारत भूमि एवं वेदों को जो सम्मान दिया है, वह इस प्रकार है-“अया मुबारेकल अरज मुशैये नोंहा मिनार हिंदे। व अरादकल्लाह मज्जोनज्जे जिकरतुन। 

1 वह लवज्जलीयतुन ऐनाने सहबी अरवे अतुन जिकरा।वहाजेही योनज्जेलुर्ररसूल मिनल हिंदतुन।

2।यकूलूनल्लाहः या अहलल अरज आलमीन फुल्लहुम।फत्तेबेऊ जिकरतुल वेद हुक्कुन मालन योनज्वेलतुन।

3।वहोबा आलमुस्साम वल यजुरमिनल्लाहे तनजीलन।फऐ नोमा या अरवीयो मुत्तवअन योवसीरीयोनजातुन।

4।जइसनैन हुमारिक अतर नासेहीन का-अ-खुबातुन।व असनात अलाऊढ़न व होवा मश-ए-रतुन।

5।”अर्थात-(1) हे भारत की पुण्य भूमि (मिनार हिंदे) तू धन्य है, क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझ को चुना। 

(2) वह ईश्वर का ज्ञान प्रकाश, जो चार प्रकाश स्तम्भों के सदृश्य सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है, यह भारतवर्ष (हिंद तुन) में ऋषियों द्वारा चार रूप में प्रकट हुआ।

(3) और परमात्मा समस्त संसार के मनुष्यों को आज्ञा देता है कि वेद, जो मेरे ज्ञान है, इनके अनुसार आचरण करो।

(4) वह ज्ञान के भण्डार साम और यजुर है, जो ईश्वर ने प्रदान किये। इस लिए, हे मेरे भाइयों! इनकोमानो, क्योंकि ये हमें मोक्ष का मार्ग बताते है।

(5) और दो उनमें से रिक्, अतर (ऋग्वेद, अथर्ववेद) जो हमें भ्रातृत्व की शिक्षा देते है, और जो इनकी शरण में आ गया, वह कभी अन्धकार को प्राप्त नहीं होता।इस्लाम मजहब के प्रवर्तक मोहम्मद स्वयं भी वैदिक परिवार में हिन्दू के रूप में जन्में थे, और जब उन्होंने अपने हिन्दू परिवार की परम्परा और वंश सेसंबंध तोड़ने और स्वयं को पैगम्बर घोषित करना निश्चित किया, तब संयुक्त हिन्दू परिवार छिन्न-भिन्न हो गया और काबा में स्थित महाकाय शिवलिंग (संगेअस्वद) के रक्षार्थ हुए युद्ध में पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम को भी अपने प्राण गंवाने पड़े।उमर-बिन-ए-हश्शामका अरब में एवं केन्द्र काबा (मक्का) में इतना अधिक सम्मान होता था कि सम्पूर्ण अरबी समाज, जो कि भगवान शिव के भक्त थे एवं वेदों केउत्सुक गायक तथा हिन्दू देवी-देवताओं के अनन्य उपासक थे, उन्हें अबुल हाकम अर्थात ‘ज्ञान का पिता’ कहते थे। बाद में मोहम्मद के नये सम्प्रदाय ने उन्हें ईर्ष्यावश अबुलजिहाल ‘अज्ञान का पिता’ कह कर उनकी निन्दा की।जब मोहम्मद ने मक्का पर आक्रमण किया, उस समय वहाँबृहस्पति, मंगल, अश्विनी कुमार, गरूड़, नृसिंहकी मूर्तियाँ प्रतिष्ठित थी। साथ ही एक मूर्ति वहाँविश्वविजेता महाराजा बलि की भी थी, और दानी होने की प्रसिद्धि से उसका एक हाथ सोने का बना था।‘Holul’ के नाम से अभिहित यह मूर्ति वहां इब्राहम और इस्माइल की मूर्त्तियों के बराबर रखी थी। मोहम्मद ने उन सब मूर्त्तियों को तोड़कर वहां बने कुएं में फेंक दिया, किन्तु तोड़े गये शिवलिंग का एक टुकडा आज भी काबा में सम्मान पूर्वक न केवल प्रतिष्ठित है, वरन् हज करने जाने वाले मुसलमान उस काले (अश्वेत) प्रस्तर खण्ड अर्थात ‘संगे अस्वद’ कोआदर मान देते हुए चूमते है।जबकि इस्लाम में मूर्ति पूजा या अल्लाह के अलावा किसी की भी स्तुति हराम हैप्राचीन अरबों ने सिन्ध को सिन्ध ही कहा तथा भारत वर्ष के अन्य प्रदेशों को हिन्द निश्चित किया। सिन्ध से हिन्द होने की बात बहुत ही अवैज्ञानिक है। इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद के पैदा होने से 2300 वर्ष पूर्व यानि लगभग 1800 ईश्वी पूर्व भी अरब में हिंद एवं हिंदू शब्द का व्यवहार ज्यों कात्यों आज ही के अर्थ में प्रयुक्त होता था।अरब की प्राचीन समृद्ध संस्कृति वैदिक थी तथा उस समय ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, धर्म-संस्कृति आदि में भारत (हिंद) के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध थे। हिंद नाम अरबों को इतना प्यारा लगा कि उन्होंने उस देश के नाम पर अपनी स्त्रियों एवं बच्चों के नाम भी हिंद पर रखे।अरबी काव्य संग्रह ग्रंथ ‘ से अरूल-ओकुल’ के 253वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम की कविता है जिसमें उन्होंने हिन्दे यौमनएवं गबुल हिन्दू का प्रयोग बड़े आदर से किया है। ‘उमर-बिन-ए-हश्शाम’ की कविता नई दिल्ली स्थित मन्दिर मार्ग परश्री लक्ष्मी नारायण मन्दिर (बिड़लामन्दिर)की वाटिका में यज्ञ शाला के लाल पत्थर के स्तम्भखम्बे) पर काली स्याही से लिखी हुई है, जो इस प्रकार है –” कफविनक जिकरा मिन उलुमिन तब असेक । कलुवन अमातातुल हवा व तजक्करू ।

1।न तज खेरोहा उड़न एललवदए लिलवरा ।वलुकएने जातल्लाहे औम असेरू ।

2।व अहालोलहा अजहू अरानीमन महादेव ओ ।मनोजेल इलमुद्दीन मीनहुम व सयत्तरू ।

3।व सहबी वे याम फीम कामिल हिन्दे यौमन ।व यकुलून न लातहजन फइन्नक तवज्जरू ।

4।मअस्सयरे अरव्लाकन हसनन कुल्लहूम ।नजुमुन अजा अत सुम्मा गबुल हिन्दू ।

5।अर्थात् –(1) वह मनुष्य, जिसने सारा जीवन पाप व अधर्म में बिताया हो, काम, क्रोध में अपने यौवन को नष्ट किया हो। 

(2) यदि अन्त में उसको पश्चाताप हो, और भलाई की ओर लौटना चाहे, तो क्या उसका कल्याण हो सकता है ?

(3) एक बार भी सच्चे हृदय से वह महादेव जी की पूजा करे, तो धर्म-मार्ग में उच्च से उच्चपद को पा सकता है। 

(4) हे प्रभु ! मेरा समस्त जीवन लेकर केवल एक दिन भारत (हिंद) के निवास का दे दो, क्योंकि वहां पहुंचकर मनुष्य जीवन-मुक्त हो जाता है।

(5) वहां की यात्रा से सारे शुभ कर्मो की प्राप्ति होती है, और आदर्श गुरूजनों (गबुल हिन्दू) का सत्संग मिलता है।

HINDU GODS OF PREISLAMIC ARAB

HINDU GODESS OF PREISLAMIC ARABIA :

Click below- as what was mecca kaaba masjid before- was a temple,where Muhammed destroyed all statue but one SHIVLING (what they call blackstone)-Read more below-

KAABA TEMPLE CONVERTED TO MOSQUE.

Photo: JEWELS OF BHARATAM .........SERIES [TM]</p>
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<p>Q. WERE HINDU GODDESSES WORSHIPPED IN PREISLAMIC ARABIA ?</p>
<p>A. YES !! Manāt was worshipped by </p>
<p>HINDU GODESS OF PREISLAMIC ARABIA : </p>
<p>In pure scientific study about the Historical Muhammad raises basic questions concerning the prophet's role as a moral paragon; the sources of Islamic law; and the God-given nature of the Koran. The scientists even doubt the existence of Muhammad. Scientists say that the Koran is a not a product of Muhammad or even of Arabia, but a collection of materials stitched together to meet the needs of a later age. There was no Islam until two or three hundred years after the traditional version at around 830CE. The Arab tribesmen who conquered in the seventh century vast territory were not Moslems, but were persons who worshiped idols and are scientists call them pagans.</p>
<p>Even though Prophet Muhammad was born in the full light of history the earliest document date about a century and a half after his death. Not only does this long lapse of time cast doubt on their accuracy, but internal evidence strongly suggests the Arabic sources were composed in the context of intense partisan quarrels over the prophet's life. The earliest sources like papyri, inscriptions, and coins on the prophet's life, contradict the standard biography.</p>
<p> An inscription and a Greek account fix Muhammad's birth in 552, not 570. Muhammad's career took place not in Mecca but hundreds of kilometers to the north. Yehuda Nevo. The classical Arabic language was developed not in today's Saudi Arabia but in the Levant.</p>
<p>Long before Islam came in to existence, Kaaba, in Mecca in Saudi Arabia was a pilgrimage site. The word Kaaba might have come from the Tamil Language which originated around 1700BC. In Tamil Nadu Kabaalishwaran temple is Lord Shiva’s temple and Kabaali refers to Lord Shiva. The black stone at Kaaba is held sacred and holy in Islam and is called "Hajre Aswad" from the Sanskrit word Sanghey Ashweta or Non-white stone. The Shiva Lingam is also called Sanghey Ashweta. So what is in Kaaba could be the same what Hindus worship. </p>
<p>The pedestal Maqam-E-Ibrahim at the centre of the Kaaba is octagonal in shape. In Hinduism, the pedestal of Brahma the creator is also octagonal in shape. Muslim pilgrims visiting the Kaaba temple go around it seven times. In no other mosque does the circumambulation prevail. Hindus invariably circumambulate or Pradakshina, around their deities. This is yet another proof that the Kaaba shrine is a pre-Islamic. In Shiva temples Hindus always practice circumambulation or Pradakshina. Just as in Hinduism, the custom of circumambulation by muslim pilgrims around the entire Kaaba building seven times shows that the claim that in Islam they don’t worship stones is not true

In pure scientific study about the Historical Muhammad raises basic questions concerning the prophet’s role as a moral paragon; the sources of Islamic law; and the God-given nature of the Koran. The scientists even doubt the existence of Muhammad. Scientists say that the Koran is a not a product of Muhammad or even of Arabia, but a collection of materials stitched together to meet the needs of a later age. There was no Islam until two or three hundred years after the traditional version at around 830CE. The Arab tribesmen who conquered in the seventh century vast territory were not Moslems, but were persons who worshiped idols and are scientists call them pagans.

Even though Prophet Muhammad was born in the full light of history the earliest document date about a century and a half after his death. Not only does this long lapse of time cast doubt on their accuracy, but internal evidence strongly suggests the Arabic sources were composed in the context of intense partisan quarrels over the prophet’s life. The earliest sources like papyri, inscriptions, and coins on the prophet’s life, contradict the standard biography.

An inscription and a Greek account fix Muhammad’s birth in 552, not 570. Muhammad’s career took place not in Mecca but hundreds of kilometers to the north. Yehuda Nevo. The classical Arabic language was developed not in today’s Saudi Arabia but in the Levant.

Long before Islam came in to existence, Kaaba, in Mecca in Saudi Arabia was a pilgrimage site. The word Kaaba might have come from the Tamil Language which originated around 1700BC. In Tamil Nadu Kabaalishwaran temple is Lord Shiva’s temple and Kabaali refers to Lord Shiva. The black stone at Kaaba is held sacred and holy in Islam and is called “Hajre Aswad” from the Sanskrit word Sanghey Ashweta or Non-white stone. The Shiva Lingam is also called Sanghey Ashweta. So what is in Kaaba could be the same what Hindus worship.

The pedestal Maqam-E-Ibrahim at the centre of the Kaaba is octagonal in shape. In Hinduism, the pedestal of Brahma the creator is also octagonal in shape. Muslim pilgrims visiting the Kaaba temple go around it seven times. In no other mosque does the circumambulation prevail. Hindus invariably circumambulate or Pradakshina, around their deities. This is yet another proof that the Kaaba shrine is a pre-Islamic. In Shiva temples Hindus always practice circumambulation or Pradakshina. Just as in Hinduism, the custom of circumambulation by muslim pilgrims around the entire Kaaba building seven times shows that the claim that in Islam they don’t worship stones is not true

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